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Showing posts with the label सुविचार:

#1 सुविचार: (Thought)

सुविचार: (Thought) शान्तितुल्यं तपो नास्ति            न संतोषात्परं सुखम्। न तृष्णया: परो व्याधिर्न            च धर्मो दया परा:।।   अर्थ-     शान्ति के समान कोई तप नही है, संतोष से श्रेष्ठ कोई सुख नही, तृष्णा से बढकर कोई रोग नही और दया से बढकर कोई धर्म नहीं। 

#2 सुविचार: (Thought)

सुविचार: (Thought) आदरात् संगृहीतेन शत्रुणा शत्रुमुद्धरेत्। पादलग्नं करस्थेन कण्टकेनैव कण्टकम्। अर्थ-  आदर देकर वश में किये हुए शत्रु से शत्रु को नष्ट करना चाहिए| जैसे यदि पाँव में काँटा चुभ जाए, तो उसे हाथ में पकड़े काँटे से ही निकाला जाता है। व्यक्ति को चाहिए कि वह शत्रु को भी आदर दें इससे शत्रुता स्वयं ही नष्ट हो जाती है।

सुविचार: (Thought in Sanskrit)

सुविचार: (Thought in Sanskrit) नमोनमः अद्यतनीय: सुविचार: अस्ति- (श्लोक-) अर्थात्- पुनः कथ्यामि- ( श्लोक-) धन्यवाद:। -------------------  1) मूर्खस्य पञ्च चिन्हानि, गर्वो दुर्वचनं तथा। क्रोधश्च दृढवादश्च परवाक्येष्वनादरः॥ मूर्खों के पाँच लक्षण हैं - गर्व, अपशब्द, क्रोध, हठ और दूसरों की बातों का अनादर॥   अतः हमें इन दुर्गुणों से बचना चाहिए। ‎ There are five signs of fools - Pride, abusive language, anger, stubborn arguments and disrespect for other people's opinion. ----- 2) अष्टौ गुणा पुरुषं दीपयंति, ‎ प्रज्ञा सुशीलत्व-दमौ श्रुतं च। पराक्रमश्च-बहुभाषिता च, दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च॥  आठ गुण पुरुष को सुशोभित करते हैं - बुद्धि, सुन्दर चरित्र, आत्म-नियंत्रण, शास्त्र-अध्ययन, साहस, मितभाषिता, यथाशक्ति दान और कृतज्ञता॥   Eight qualities adorn a man -intellect, good character, self-control, study of scriptures, valor, less talking, charity as per capability and gratitude. ------ 3) काव्यशास्त्रविनोदेन कालोगच्छति धीमताम्। ‎ व्यस...