9.1.1 कक्षा- नवमी, विषय:- संस्कृतम् पाठ - 1 अहं नमामि Class- 9th, Subject - Sanskrit, Lesson-1 Aham Namami NCERT Book - इरावती / IRAVATI
9.1.1 कक्षा- नवमी, विषय:- संस्कृतम्
पाठ - 1 अहं नमामि
Class- 9th, Subject - Sanskrit,
Lesson-1 Aham Namami
NCERT Book - इरावती / IRAVATI
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श्लोक, शब्दार्थ एवं हिंदी अर्थ
श्लोक 1 - 2
अहं नमामि मातरं गुरुं नमामि सादरम् ॥१॥
स्वयं पठामि सर्वदा प्रियं वदामि सर्वदा ॥२॥
शब्दार्थ:
अहं = मैं
नमामि = प्रणाम करता/करती हूँ
मातरम् = माता को
गुरुम् = गुरु को
सादरम् = आदर के साथ (सहित)
स्वयं = खुद/अपने आप
पठामि = पढ़ता/पढ़ती हूँ
सर्वदा = हमेशा/सदा
प्रियम् = मीठा/प्यारा
वदामि = बोलता/बोलती हूँ
अर्थ: मैं अपनी माता को प्रणाम करता हूँ और आदर के साथ अपने गुरु को प्रणाम करता हूँ। मैं हमेशा स्वयं (मन लगाकर) पढ़ाई करता हूँ और हमेशा मधुर (प्रिय) बोलता हूँ।
श्लोक 3 - 4
हितं करोमि सर्वदा शुभं करोमि सर्वदा ॥३॥
हरिं नमामि सादरं गुरुं नमामि सादरम् ॥४॥
शब्दार्थ:
हितम् = भलाई/कल्याण
करोमि = करता/करती हूँ
शुभम् = अच्छा/मंगल
हरिम् = भगवान (विष्णु/ईश्वर) को
अर्थ: मैं हमेशा सबका भला (हित) करता हूँ और हमेशा शुभ (अच्छा) कार्य करता हूँ। मैं आदर के साथ भगवान (हरि) को प्रणाम करता हूँ और आदर सहित अपने गुरु को प्रणाम करता हूँ।
श्लोक 5, 6, 7
चलामि नीति-सत्पथे हरामि मातृभू-व्यथाम् ॥५॥
दधामि साधुताव्रतम् सृजामि कीर्तिसत्कथाम् ॥६॥
प्रभुं जपामि सादरम् अहं नमामि मातरम् ॥७॥
शब्दार्थ:
चलामि = चलता/चलती हूँ
नीति-सत्पथे = नीति और सत्य के मार्ग पर
हरामि = दूर करता/करती हूँ
मातृभू-व्यथाम् = मातृभूमि के दुःख/कष्ट को
दधामि = धारण करता/करती हूँ
साधुताव्रतम् = सज्जनता या अच्छे व्यवहार के व्रत को
सृजामि = रचना करता/करती हूँ (बनाता हूँ)
कीर्तिसत्कथाम् = यश और अच्छी कहानियों/कीर्ति को
प्रभुम् = ईश्वर/स्वामी को
जपामि = जपता/स्मरण करता हूँ
अर्थ: मैं हमेशा नीति और सत्य के मार्ग पर चलता हूँ और अपनी मातृभूमि के दुखों को दूर करता हूँ। मैं सज्जनता के व्रत को धारण करता हूँ और अपनी कीर्ति (यश) तथा अच्छी गाथाओं की रचना करता हूँ। मैं आदर के साथ प्रभु का नाम जपता हूँ और अपनी माता को प्रणाम करता हूँ।
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