9.5.2 कक्षा- नवमी, विषय:- संस्कृतम् पाठ- 5 दानवीर: कर्ण: Class- 9th, Subject - Sanskrit, Lesson- 5 DanVeerH KarnH NCERT Book - इरावती / IRAVATI
9.5.2 कक्षा- नवमी, विषय:- संस्कृतम्
पाठ- 5 दानवीर: कर्ण:
Class- 9th, Subject - Sanskrit,
Lesson- 5 DanVeerH KarnH
NCERT Book - इरावती / IRAVATI
************************************
वयम् अभ्यासं कुर्मः
अस्मद् शब्द (ASMAD Shabd)
सर्वनाम (मैं, हम)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथमा | अहम् | आवाम् | वयम् |
| द्वितीया | माम् | आवाम् | अस्मान् |
| तृतीया | मया | आवाभ्याम् | अस्माभि: |
| चतुर्थी | मह्यं | आवाभ्याम् | अस्मभ्य: |
| पंचमी | मत् | आवाभ्याम् | अस्मभ्य: |
| षष्ठी | मम | आवयो: | अस्माकम् |
| सप्तमी | मयि | आवयो: | अस्माषु |
श्लोक: (केवल पढ़ने के लिए)
शिक्षा क्षयं गच्छति कालपर्ययात्
सुबद्धमूला निपतन्ति पादपाः ।
जलं जलस्थानगतं च शुष्यति
हुतं च दत्तं च तथैव तिष्ठति ॥
शब्दार्थ:
- शिक्षा क्षयं गच्छति कालपर्ययात् – समय बीतने के साथ ग्रहण की गई शिक्षा (विद्या) भी नष्ट हो जाती है।
- सुबद्धमूला निपतन्ति पादपाः – अत्यंत मजबूत जड़ों वाले वृक्ष भी समय आने पर गिर जाते हैं।
- जलं जलस्थानगतं च शुष्यति – जलाशयों (सरोवरों/नदियों) में संचित जल भी सूख जाता है।
- हुतं च दत्तं च तथैव तिष्ठति – किंतु यज्ञ में दी गई आहुति (हवन) और सुपात्र को दिया गया दान सदा वैसा ही स्थिर (अमर) रहता है।
भावार्थ:
समय बीतने के साथ सब कुछ समाप्त हो जाता है—विद्या का प्रभाव क्षीण हो जाता है, गहरी जड़ों वाले विशाल पेड़ भी उखड़ कर गिर जाते हैं और जलाशयों का पानी भी सूख जाता है। संसार की समस्त भौतिक वस्तुएँ नश्वर हैं, केवल परोपकार के रूप में दिया गया दान और धर्म के निमित्त किया गया हवन/सत्कर्म ही हमेशा स्थायी रहता है और कभी नष्ट नहीं होता।